6 लेन विज्ञान पथ, 250 किलोमीटर होगा लंबा; लखनऊ को इन पांच जिलों से जोड़ेगा!

लखनऊ को इन पांच जिलों से जोड़ेगा 250 किलोमीटर लंबा 6 लेन विज्ञान पथ, आसान होगा

यूपी की राजधानी लखनऊ को 5 जिलों हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली और उन्नाव से  250 किलोमीटर लंबा 6 लेन विज्ञान पथ जोड़ेगा। इससे राहगीरों का सफर आसान होगा। लोगों को जाम से भी राहत मिलेगी!

राजधानी लखनऊ के विकास और यातायात व्यवस्था में ऐतिहासिक सुधार लाने के लिए एलडीए विज्ञान पथ नामक 250 किलोमीटर लंबी, छह-लेन की एक महत्वाकांक्षी सड़क परियोजना तैयार कर रहा है। यह पथ लखनऊ को हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली और उन्नाव जैसे पांच जिलों को जोड़ेगा। एलडीए इस परियोजना को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) की तर्ज पर विकसित किए जा रहे राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) के विस्तृत परियोजना रिपोर्ट में शामिल कर रहा है। इससे राहगीरों का सफर आसान होगा। लोगों को जाम से भी राहत मिलेगी।

विज्ञान पथ सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि क्षेत्रीय विकास की नई रीढ़ साबित होने जा रही है। इस पथ के माध्यम से लखनऊ से हरदोई, सीतापुर, बाराबंकी, रायबरेली और उन्नाव की सीधी कनेक्टिविटी बनेगी। 250 किलोमीटर लंबा यह राजमार्ग छह लेन का होगा, जिससे भारी वाहनों और आम यातायात दोनों के लिए समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

वर्तमान में इन जिलों से लखनऊ पहुंचने में जहां जाम और संकरी सड़कों की वजह से घंटों लगते हैं, वहीं विज्ञान पथ बनने के बाद यह दूरी लगभग आधी रह जाएगी। हर जिले से राजधानी तक 60 से 75 मिनट में पहुंचा जा सकेगा।

ट्रैफिक जाम से मिलेगी राहत, बढ़ेगा औद्योगिक विकास

एलडीए के मुख्य नगर नियोजक के अनुसार, विज्ञान पथ को 2027 तक राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) का हिस्सा बना दिया जाएगा। इसके बनने से राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन आएगा। शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम की समस्या में भारी कमी होगी, क्योंकि भारी वाहन सीधे बाहरी परिधीय मार्ग से गुजर सकेंगे। इस परियोजना के साथ 20 विकास नोड भी प्रस्तावित हैं, जिनमें औद्योगिक पार्क, शैक्षणिक संस्थान, स्वास्थ्य केंद्र और व्यावसायिक परिसर विकसित किए जाएंगे। यह लखनऊ और आसपास के जिलों में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।

अटल बिहारी वाजपेयी के जय विज्ञान नारे से प्रेरित नाम

इस हाईवे का नाम विज्ञान पथ पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित होगा। उनके प्रसिद्ध नारे जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान से प्रेरणा लेकर इस परियोजना का नाम प्रस्तावित किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक सड़क नहीं, बल्कि ‘विज्ञान, प्रगति और समृद्धि’ का मार्ग बनेगी। परियोजना के डिजाइन में पर्यावरण संरक्षण, सोलर लाइटिंग और ग्रीन बेल्ट की भी विशेष व्यवस्था की जाएगी ताकि यह भविष्य में एक पर्यावरण अनुकूल कॉरिडोर के रूप में उदाहरण बने।

ग्लोबल सिटी की दिशा में लखनऊ की बड़ी छलांग

लखनऊ विकास प्राधिकरण का यह प्रयास राजधानी को ग्लोबल सिटी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। विज्ञान पथ बनने से जहां क्षेत्रीय यातायात सुगम होगा, वहीं राजधानी की सीमाओं का विस्तार भी एससीआर मॉडल के तहत सुनिश्चित होगा। एलडीए के अधिकारियों के मुताबिक, इस पथ के निर्माण से लखनऊ की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। आसपास के जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ेंगी, शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थान सुलभ होंगे तथा कृषि उत्पादों के परिवहन में भी तेजी आएगी।

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