रामायण काल का अद्भुत विज्ञान; पुष्पक विमान

रामायण काल का अद्भुत विज्ञान: जानें रावण के ‘पुष्पक विमान’ का ए टू जेड रहस्य

लखनऊ: भारतीय संस्कृति और धर्मग्रंथों में विज्ञान और तकनीक का समावेश प्राचीन काल से ही रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है ‘पुष्पक विमान’। रामायण और अन्य पौराणिक ग्रंथों में इस विमान की जो व्याख्या मिलती है, वह आज के आधुनिक विमानों को भी पीछे छोड़ देती है।

कुबेर से रावण तक का सफर
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पुष्पक विमान के वास्तविक निर्माता देव-शिलपी *विश्वकर्मा* थे। ब्रह्मा जी ने इसे धन के देवता *कुबेर* को उपहार स्वरूप दिया था। लेकिन, अपनी अपार शक्ति के मद में चूर लंकेश यानी रावण ने अपने सौतेले भाई कुबेर को युद्ध में पराजित कर उनसे यह दिव्य विमान छीन लिया था।

कैसा दिखता था अंदर और बाहर से पुष्पक विमान?
ग्रंथों में इस विमान की बनावट का वर्णन किसी भव्य महल जैसा किया गया है:
*बाहरी स्वरूप:* यह विमान पूरी तरह स्वर्ण (सोने) से निर्मित था, जिसमें बेशकीमती रत्न, मणि और मोती जड़े हुए थे। इसके ऊपर हाथी, घोड़े और पक्षियों की सजीव लगने वाली स्वर्ण आकृतियां बनी थीं।*आंतरिक भव्यता:* विमान के भीतर भव्य शयनकक्ष (Bedrooms), सुंदर बैठकें और भोजन कक्ष बने हुए थे। यह किसी उड़ते हुए महल जैसा था, जिसमें खिड़कियां और स्वर्ण स्तंभों वाली सीढ़ियां भी थीं।

  • पुष्पक विमान की 5 चमत्कारी विशेषताएं
    1. *मनो-वेग:* यह विमान चालक की इच्छाशक्ति या मन की गति से चलता था। चालक जहां जाने का विचार करता, विमान पलक झपकते वहां पहुंच जाता।
    2. *असीमित आकार:* इसकी सबसे बड़ी खूबी यह थी कि इसमें कितने भी यात्री सवार हों, हमेशा एक सीट खाली रहती थी। यह यात्रियों की संख्या के हिसाब से अपना आकार बढ़ा या घटा सकता था।
    3. *वातानुकूलित (AC):* इसके भीतर का वातावरण हमेशा सुखद रहता था। बाहर चाहे भीषण ठंड हो या गर्मी, अंदर का तापमान हमेशा संतुलित और सुगंधित हवा से भरा रहता था।
    4. *दिव्य हंसों द्वारा चालित:* चित्रों और ग्रंथों में इसे अक्सर दिव्य स्वर्ण हंसों द्वारा आकाश में ले जाते हुए दर्शाया गया है।
    5. *काल-रहित:* इस विमान पर समय और मौसम का कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता था।

धर्म और विजय का प्रतीक
रावण की मृत्यु के बाद, भगवान श्री राम इसी पुष्पक विमान पर सवार होकर माता सीता और लक्ष्मण के साथ अयोध्या लौटे थे। अयोध्या पहुंचने के बाद, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने इस विमान को सम्मानपूर्वक उसके वास्तविक स्वामी कुबेर के पास वापस भेज दिया, जो उनके धर्मपरायण चरित्र को दर्शाता है।
आज का आधुनिक विज्ञान भी पुष्पक विमान की इन अद्भुत विशेषताओं को समझने का प्रयास कर रहा है, जो यह सिद्ध करता है कि हमारे पूर्वज तकनीकी रूप से कितने उन्नत थे।

*ब्यूरो रिपोर्ट: नमन श्रीवास्तव BMSPNEWS24*

  • Related Posts

    लखनऊ: एलडीए ले आया दो बड़े प्रोजेक्ट, आईटी और वेलनेस सिटी में जमीन खरीद-बिक्री पर लगेगी रोक!

    लखनऊ। लखनऊ विकास प्राधिकरण शीघ्र ही राजधानी की दो महत्वाकांक्षी आवासीय योजनाओं आईटी सिटी व वेलनेस सिटी में जमीन की खरीद बिक्री पर जल्द रोक लगेगी। भूमि अर्जन अधिनियम-2013 की धारा-11 एक सप्ताह…

    पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव के पुत्र की हुई मृत्यु, सपा में शोक की लहर!

    समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के परिवार से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है. अखिलेश यादव के भाई प्रतीक यादव (38) का लखनऊ में निधन हो गया है. प्रतीक यादव,…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    लखनऊ: एलडीए ले आया दो बड़े प्रोजेक्ट, आईटी और वेलनेस सिटी में जमीन खरीद-बिक्री पर लगेगी रोक!

    रामायण काल का अद्भुत विज्ञान; पुष्पक विमान

    पूर्व मुख्यमंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव के पुत्र की हुई मृत्यु, सपा में शोक की लहर!

    भारतीय मानवाधिकार सुरक्षा परिषद(रजि.) ने मानवाधिकार जागरूकता अभियान का अलख जगाया!

    मानवाधिकार आयोग के बावजूद क्यों जरूरी हैं मानवाधिकार संगठन? आइये जानते है एक ज़मीनी सच्चाई!

    म.प्र. के जबलपुर में भारतीय मानवाधिकार सुरक्षा परिषद की भव्य बैठक हुई संपन्न; नई सोच नई ऊर्जा और नई रणनीति का हुआ आगाज़।